Explore Chapter 4: Utsah aur At Nahi Rahi by Suryakant Tripathi ‘Nirala’ with structured data tables for quick revision. Understand themes of nature, emotions, poetic expression, and literary features in an organized format, helping CBSE students grasp concepts clearly and retain them easily.
| विषय | विवरण | मुख्य वर्ष/अवधि | प्रमुख रचनाएँ/प्रसंग | प्रभावित करने वाले कारक/विशेषता |
|---|---|---|---|---|
| जन्म और पृष्ठभूमि | सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म बंगाल के महिषादल में हुआ। वे मूलतः उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के निवासी थे। | 1899 | महिषादल, बंगाल; गढ़ाकोला, उन्नाव | रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद की विचारधारा का विशेष प्रभाव। |
| शिक्षा और ज्ञान | औपचारिक शिक्षा नवीं तक महिषादल में हुई, जिसके बाद स्वाध्याय से विभिन्न भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। | विद्यार्थी जीवन | संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी का ज्ञान; संगीत और दर्शनशास्त्र का अध्ययन। | निरंतर स्वाध्याय और दर्शन के प्रति गहरी रुचि। |
| साहित्यिक कृतियाँ | निराला ने कविता के साथ-साथ उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध लेखन में भी ख्याति अर्जित की। | साहित्यिक काल | अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता और नये पत्ते; निराला रचनावली (आठ खंड)। | छायावादी रचनाकारों में सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग। |
| कविता: उत्साह | यह एक आह्वान गीत है जो बादल को संबोधित है, जो क्रांति और नए जीवन का प्रतीक है। | स्रोत में उपलब्ध नहीं | बादल, 'नवजीवन', 'नूतन कविता' | विप्लव, विध्वंस और क्रांति चेतना के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन। |
| कविता: अट नहीं रही है | यह कविता फागुन मास की सर्वव्यापक सुंदरता और मादकता का वर्णन करती है। | फागुन (वसंत ऋतु) | फागुन की आभा, पत्तों से लदी डालियाँ, पुष्प-माल। | प्रकृति का व्यापक सौंदर्य और अंतर्मन के भावों का सामंजस्य। |
| निधन | दुखों और संघर्षों से भरे जीवन के बाद उनका देहांत हुआ। | 1961 | जीवन का अंत | आत्मीय जनों का असामयिक निधन और साहित्यिक मोर्चे पर अनवरत संघर्ष। |
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